Wednesday, March 10, 2010

ज्योतिषी कौन है ?

ज्योतिष का अर्थ है ......ज्योति यानी प्रकाश ,इस प्रकार ज्योतिषी का अर्थ हुआ जो प्रकाशमान हो ......और दूसरों को भी अपने ज्ञान के प्रकाश से रास्ता दिखा सके......वर्तमान समय में ज्योतिषी वह व्यक्ति है जो जाति से ब्राह्मण हो (हालांकि यह मुख्य शर्त नहीं है ),धोती कुरता या कुरता पायजामा पहनता हो .......तिलक लगाता हो ......शिखा रखता हो .....और तमाम श्लोक, मंत्र गिना सकता हो......उसका पहनावा और दिखावा निश्चित हो ....चाहे उसके अन्दर मर्यादा ,आध्यात्म,आचरण और शुचिता हो, या न हो ........
आचार्य वराहमिहिर ने ,जो की ज्योतिष के प्रणेता थे ,ने एक ज्योतिषी होने की तमाम शर्तें बताई हैं......जिनमे मूल रूप से आचरण और संस्कारों की बात ही कही गयी है ......वराहमिहिर ने कोई " ड्रेस कोड" नहीं बताया है......अहंकार तो सर्वथा त्याज्य है उनकी परिभाषा में ......जबकि वर्त्तमान समय के माननीय ज्योतिषी किसी व्यक्ति के भविष्य के बारे में ऐसे चुनौतियां देते हैं मानो उन्होंने ही उस व्यक्ति का जीवन नियत किया है और जनता यह समझती है ज्योतिषी तो स्वयं भगवान का सोलह कला युक्त अवतार है और वह उसके जीवन की तमाम समस्याओं को नष्ट कर देगा ...........जनता और ज्योतिषी दोनों ही ज्योतिष जैसे महान पराविज्ञान के महत्व को समझे बिना इसका प्रयोग कर रहे हैं और असफलता की दशा में एक दूसरे पर दोषारोपण भी कर रहे हैं....
कहाँ हैं आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ज्योतिषी और कहाँ है वह जनता जो इस बात को समझ सके ?

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