Wednesday, March 17, 2010

नवरात्रि और नवदुर्गा

नवरात्रि वर्ष में चार बार मनाई जाती है....हममे से ज्यादातर लोग केवल दो नवरात्रियों से ही परिचित हैं .....एक है चैत्र नवरात्रि (जो मार्च अप्रैल में आती है) और दूसरी है आश्विन नवरात्रि (जो सितम्बर अक्टूबर में आती है ).....इसके अलावा दो और भी नवरात्रियाँ हैं जो माघ (जनवरी) और आसाढ़ (जून-जुलाई) में आती हैं .......माघ और आसाढ़ की नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है.......
जहाँ तक नवदुर्गा की बात है .....सबसे पहले शक्ति की ही उपासना शुरू हुयी और उस काल के मानव ने जिन जिन चीज़ों में कुछ विशिष्ट देखा उन सबको एक एक शक्ति का नाम दिया और पूजा उपासना की......नवदुर्गा शक्ति और शरीर के विभिन्न चक्रों को तो दर्शाती ही है ,साथ ही साथ यह नौ तरह की औषधियों से भी सम्बन्ध रखती है.....मूल रूप से इन दैवीय गुण संपन्न औषधियों को ही अलग अलग शक्तियों और चक्रों के साथ जोड़कर नव दुर्गा या नौ देवियों का नाम दिया गया.....
यह नौ औषधीय पदार्थ हैं -
१-केला २-कचु ३-हल्दी ४-जयन्ती ५-अशोक ६-बेल ७-अनार ८-मान और ९-धान
इन्ही से देवियों का और चक्रों का सम्बन्ध भी जोड़ा गया क्योंकि इन नौ औषधियों के प्रयोग से मन और शरीर दोनों को स्वस्थ रक्खा जा सकता है ......जो लोग धर्म को कर्मकांडी कहकर इसकी आलोचना करते हैं ,उन्हें यह समझना चाहिए की प्राचीन ऋषियों ने हर चीज़ को ईश्वर माना है और उसके गुणों को स्थापित करने के लिए नाना प्रकार की व्यवस्थायें की हैं.......नव दुर्गा शरीर के चक्र की अभिव्यक्ति भी है और नौ अद्भुत औषधियों की भी.....

शैलेन्द्र पाण्डेय

Wednesday, March 10, 2010

ज्योतिषी कौन है ?

ज्योतिष का अर्थ है ......ज्योति यानी प्रकाश ,इस प्रकार ज्योतिषी का अर्थ हुआ जो प्रकाशमान हो ......और दूसरों को भी अपने ज्ञान के प्रकाश से रास्ता दिखा सके......वर्तमान समय में ज्योतिषी वह व्यक्ति है जो जाति से ब्राह्मण हो (हालांकि यह मुख्य शर्त नहीं है ),धोती कुरता या कुरता पायजामा पहनता हो .......तिलक लगाता हो ......शिखा रखता हो .....और तमाम श्लोक, मंत्र गिना सकता हो......उसका पहनावा और दिखावा निश्चित हो ....चाहे उसके अन्दर मर्यादा ,आध्यात्म,आचरण और शुचिता हो, या न हो ........
आचार्य वराहमिहिर ने ,जो की ज्योतिष के प्रणेता थे ,ने एक ज्योतिषी होने की तमाम शर्तें बताई हैं......जिनमे मूल रूप से आचरण और संस्कारों की बात ही कही गयी है ......वराहमिहिर ने कोई " ड्रेस कोड" नहीं बताया है......अहंकार तो सर्वथा त्याज्य है उनकी परिभाषा में ......जबकि वर्त्तमान समय के माननीय ज्योतिषी किसी व्यक्ति के भविष्य के बारे में ऐसे चुनौतियां देते हैं मानो उन्होंने ही उस व्यक्ति का जीवन नियत किया है और जनता यह समझती है ज्योतिषी तो स्वयं भगवान का सोलह कला युक्त अवतार है और वह उसके जीवन की तमाम समस्याओं को नष्ट कर देगा ...........जनता और ज्योतिषी दोनों ही ज्योतिष जैसे महान पराविज्ञान के महत्व को समझे बिना इसका प्रयोग कर रहे हैं और असफलता की दशा में एक दूसरे पर दोषारोपण भी कर रहे हैं....
कहाँ हैं आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ज्योतिषी और कहाँ है वह जनता जो इस बात को समझ सके ?

Friday, March 5, 2010

राशियों की समस्या

लगभग १०-१२ सालों से ज्योतिष के क्षेत्र में काम करते हुए सबसे पहले यही समझ आया कि , ज्योतिष जैसा आम आदमी का विज्ञान ,किस तरह से लोगों की मुश्किलें कम करने के बजाय लोगों कि मुश्किल बढ़ा रहा है इसमें सबसे बड़ी मुश्किल राशी समझने की है....एक आदमी सामान्यतः तीन तरह की राशियों के प्रभाव में होता है.......पहली जो उसकी जन्म तिथि और जन्म समय पर आधारित होती है यानी कि चन्द्र राशी ,दूसरी जो केवल जन्म तिथि पर आधारित होती है यानी कि सूर्य राशी और तीसरी जिसमे तिथि और समय से कोई लेना देना नहीं होता ,जो नाम पर आधारित होती है यानी कि नाम राशी समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में राशी फल दिखाया जाता है जिसमे आम आदमी की खूब रूचि होती है ,परन्तु वह अपनी तीन राशियों में से किसको सही माने और क्या समझे .....यह समझ नहीं आता.... जहाँ तक मेरे ज्योतिषीय अनुभव की बात है ,चन्द्र राशी का गणित थोडा मुश्किल जरूर है परन्तु उसका फल ज्यादा सटीक और सही होता है ,इसलिए राशिफल देखने के लिए पहले अपना जन्म समय और तिथि जानकर चन्द्र राशी की गणना करवा लें और उसी के आधार पर राशिफल देखें या शुभ अशुभ का निर्धारण करें .......राशी फल कहीं भी हो कैसी भी लिखी हो आप केवल अपनी चन्द्र राशी ही देखें.....अगर आपको अपनी जन्म तिथि और समय का ज्ञान नहीं है तब आप अपनी नाम राशी का ही प्रयोग करें .....और इसके लिए उसी नाम को चुनें जो ज्यादा पापुलर यानी प्रसिद्द हो......

शैलेन्द्र पाण्डेय