जीवन की तमाम अनिश्चितताओं में , जब व्यक्ति को एक सहारे की जरूरत पड़ती है तो वह धर्म की ओर , ज्योतिष की ओर और तमाम अन्य चीज़ों की ओर जाता है. ज्योतिष वास्तव में एक ऐसा सहारा हो सकता है , जिसमे व्यक्ति की समस्याओं का बेहतर समाधान निकला जा सके , पर ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि ज्योतिष भी अन्य भौतिक चीज़ों की तरह सीमित है , इसको न तो असीमित कह सकते हैं और न ही ये सभी समस्याओं का हल निकल सकता है. यह केवल समस्याओं, उसके प्रभाव और समय की तरफ इशारा कर सकता है. आजकल जिस तरह के ज्योतिष का प्रचलन है , वह केवल अच्छे प्रस्तुतीकरण की बात है , न कि ज्ञान की. परेशान व्यक्ति के सामने अच्छा प्रतुतिकरण (Presentation) जरूरी है ताकि आप उसकी बात समझ पायें और उसका भरोसा आप पर जम पाए , इसके बाद समस्याओं के अनुसार सही समय और सही उपाय बताकर उसका मार्गदर्शन करना चाहिए. केवल अपने आवरण और झाम ताम (Pump & Show) से व्यक्ति को प्रभावित करना और उल्टी सीधी भविष्यवाणियाँ बताकर उसको भयभीत करके धन का दोहन करना एक लुटेरे का काम हो सकता है , ज्योतिषी का नहीं. आज कल की एक और बड़ी मुश्किल है कि हर व्यक्ति ने अपनी एक ज्योतिष की पुस्तक लिख दी है जिसको वो "संहिता" कहते हैं , मानो ब्रह्मा जी ने स्वयं उनको ये पुस्तक दी है .....इसका मतलब तो यही हुआ कि जो ऋषियों ने संहिताएँ लिखी हैं , उसका कोई मूल्य नहीं है....अब की लिखी गई संहिताएँ ही अमूल्य हैं. अगर काम ही करना है तो बेहतर होगा कि प्राचीन संहिताओं का नया विश्लेषण किया जाय और ज्योतिष को नयी दिशा दी जाय.
अब तो बस इसी बात का इन्तजार है कि कब ये ये ज्योतिष की ठेकेदारी बंद होगी , और ज्योतिषी अपनी जिम्मेदारी समझकर समाज को एक नयी दिशा देंगे.
शैलेन्द्र