उन्नति के बढ़ने के साथ साथ लोगों की समस्याएँ बढती जा रही हैं..........धैर्य घटता जा रहा है,भक्ति और श्रद्धा अंधविश्वास में बदलती जा रही है,परिणाम स्वरुप ज्योतिष जैसी विधा, जो चमत्कारपूर्ण दिखती है ,का प्रचलन शिखर पर पंहुंच गया है......मुश्किलों से निकलने के लिए ज्योतिष में सबसे पहली चीज़ समस्या को समझना है तथा तब जाकर उसके अनुसार उपाय ढूंढना है.....ज्योतिषी के अन्दर जितनी सात्विकता होगी और जितना ही व्यक्ति के तत्वों को वह समझ पायेगा उतना ही सही निर्णय ले पायेगा कि व्यक्ति को मन्त्रों का प्रयोग करवाना है,रत्नों का या रंगों का .......या अति विशेष दशाओं में यंत्रों का ......जहाँ तक मन्त्रों और रत्नों की बात है इसके बारे में विज्ञान काफी हद तक उन्नत है और इसके ज्ञान का काफी प्रचार प्रसार हो चुका है इसलिए एक ज्योतिषी से अपेक्षा की जायेगी कि वह मन्त्रों और रत्नों का सुझाव ठीक ही देगा ....और इसके शुभ-अशुभ परिणामों से परिचित होगा.....
परन्तु यन्त्र के विज्ञान की दशा और इसका रहस्य अभी भी काफी हद तक अज्ञात है ....बहुत ही कम अंशों में इसपर प्रमाणिक साहित्य उपलब्ध है और जो है भी उसमे भी ज्यादातर भ्रामक और सतही है......यंत्रों का ज्ञान अभी भी परंपरा से ही मिल सकता है और इसका मुख्य भाग यानी निर्माण और प्रयोग अभी भी रहस्य में है.........................................
तमाम समस्याओं के निवारण के लिए बाज़ार में तमाम यन्त्र उपलब्ध हैं जो थोक भाव में सोने,चांदी या ताम्बे की प्लेटों पर छाप दिए जाते हैं या लोकेट में जड़ दिए जाते हैं....समस्याओं के निवारण के लिए इन्ही नकली यंत्रों का प्रयोग होता है और खूब होता है ....जैसे अगर धन की समस्या है तो श्री यन्त्र,दुर्घटना के लिए दुर्घटना नाशक यन्त्र,ग्रहों के लिए नवग्रह यन्त्र आदि ...इन यंत्रों से लाभ तो हो ही नहीं सकता , इनको बेचने वाले दुकानदार का भले ही थोडा सा लाभ हो जाए ,पर ये सिवाय सजावटी चित्र के और कुछ भी नहीं हैं,सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है कि तथाकथित ज्योतिषी लोग स्वयं ही इन सजावटी यंत्रों को दूकान से खरीदते हैं और फिर उच्चतम दामों पर बेचते हैं......यंत्रों का निर्माण , प्रयोग और विकास एक बड़ी रहस्यमयी प्रक्रिया है और जहाँ तक मुझे परंपरा से ज्ञात है , हर यन्त्र के निर्माण का वर्ष में अलग अलग समय और मुहूर्त होता है जो केवल कुछ ही समय का होता है और उसी में उस यन्त्र का निर्माण स्थापना,शोधन,और जागरण होता है.....यंत्रों का निर्माण करने वाला व्यक्ति प्रकाश , ज्यामितीय और मन्त्रों का ज्ञाता होना चाहिए .......जैसे श्री यन्त्र अगर केवल एक व्यक्ति ही बनाये जो हर प्रकार से इसके लिए योग्य हो तो वर्ष में केवल एक ही शुद्ध श्री यन्त्र बना सकेगा.......इस प्रकार देखा जाए तो इस प्रकार का सिद्ध व्यक्ति ही मिलना मुश्किल है और मिल भी गया तो अपने पूरे जीवन काल में १० से ज्यादा यन्त्र नहीं बना सकता .....तो फिर प्रकार बाकी बिकने वाले यन्त्र शुद्ध और सिद्ध होंगे ये तो बेचने वाला ही जानता होगा ....यन्त्र बेचने वाले और यंत्रों की चर्चा करने वाले तो ये तक नहीं जानते कि श्री यन्त्र में अलग अलग बिंदु क्या कर सकते हैं और अगर एक भी बिंदु गलत हुआ या श्री यन्त्र उल्टा रक्खा गया तो फायदे (जो कभी नहीं होता) के बजाय नुकसान हो सकता है और गंभीर नुकसान हो सकता है.....................
वर्तमान यंत्रों का सच यही है .....जो आज ज्योतिषियों की गैर जिम्मेदारी और लोलुपता से इस तरह लोगों के शोषण का अस्त्र बन गया है कि यन्त्र विज्ञान शोध के बजाय अर्थशास्त्र का विषय बन गया है..........................
शैलेन्द्र पाण्डेय